क्या आप जानते हैं भारत के मंदिरों में कितना पैसा है
हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप सब लोग उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे फिट होंगे और स्वस्थ होंगे और भगवान आपके परिवार पर कृपा बनाए रखें। तो आज हम बात करने जा रहे हैं भारत के मंदिरों में कितना पैसा है।
भारत के मंदिरों में कितना पैसा है
जिन मंदिरों में हम अपनी मेहनत की कमाई दे रहे। आज कोरोना वायरस जैसी महामारी के वक्त ना ही भगवान काम आ रहे हैं और ना ही मंदिर का चढ़ावा।
देश में इतनी बड़ी आपदा आई है कि मेडिकल उपकरण में कमी और खाने-पीने में भी कमी आए हैं आर्थिक तंगी से जूझ रहा है भारत।
इन मंदिरों पर अरबों खरबों पैसा जमा है और ब्राह्मण पर कुंडली जमाए बैठे हैं।
आखिर यह मंदिर का पैसा जा कहां रहा है।
केरल का पद्मनाथ मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिर में आता है। 1 साल की कमाई इसकी है 147 लाख करोड़।
आंध्र प्रदेश का तिरुपति बाला मंदिर 1 साल का कमाई 52 हजार करोड़।
मंदिर हर साल 600 करोड़ की कमाई करते हैं।
श्री साईं बाबा मंदिर देश का सबसे फेमस मंदिरों में से एक है।
1 साल का टोटल है 2200 करोड़।
जम्मू कश्मीर का वैष्णो देवी मंदिर 1 साल में 500 करोड़ की कमाई करता है।
मंदिर में 1200 सौ करोड़ का तो सोना ही है।
मुंबई के सिद्धिविनायक 1 साल का 125 करोड़ कमाई है।
इस भारत में कुल लाख 5000 कस्बे 400 बड़े शहर। हनुमान हर गांव में मंदिर होता है। शहरों में देवी देवताओं के अलग से ही मंदिर होते हैं।
इस हिसाब से सोचिए तो देश में से ब्राह्मणों का राज है।
गुजरात का सोमनाथ मंदिर।
काशी का विश्वनाथ मंदिर।
पुरि का जगन्नाथ मंदिर।
धार्मिक स्थलों पर कैसा जमकर पूरी भरी हुई है।
जरा सोचिए हर मंदिर का दान कर दें।
तो सोचिए 1 दिन में भारत से गरीबी हट जाए।
लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे। धर्म के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाते हैं।
और ब्राह्मण लोग उसी पैसे पर मौज करते हैं।
अगली बार जब यहां याद रखें कि आपकी खून पसीने की कमाई पर कौन अस कर कौन ।
मंदिर में या मस्जिद में सीमेंट की को बोरी दान देने से पहले
पड़ोस में देखने की कोई पड़ोसी भूखा तो नहीं है है तो उसे आटे की शैली दे दीजिए।
दान करना गलत नहीं है लेकिन सोचने वाली बात है कि आपके दान से किसका भला हो रहा है।
जो लोग दान करने वालों की मानसिकता क्या है।
कई किसान भूख से मर जाते हैं लेकिन उनकी मदद कोई करने नहीं आता।
लेकिन मंदिर में करोड़ों लोग को दान कर क्या मिलता है।
हम आपको एक बात साफ करने की हम कोई नास्तिक नहीं। हमारे यह भी भगवान मैं उतनी ही आस्था जितनी आपके अंदर है।
लेकिन सोचने वाली बात यह है की जो लोग मंदिर में दान करते हैं उनके पीछे की मानसिकता क्या है।
क्या उनको भगवान से डर लगता है। ऐसे लोग जो काला धन करते हैं और उनके मन में बात रहती है कि भगवान के मंदिर में कुछ दान कर हम बच जाएंगे।
मगर आप किसी असाध्य गरीब की मदद करें उस गरीब क्यों मन से निकली है दुआ दान से भी बहुत बड़ी होगी।
लास्ट में यही कहना चाहूंगा किसी भी मंदिर में दान उतना ही करें जितना उस की जरूरत है।
आर्टिकल कैसा लगा कमेंट करके बताएं शेयर करें सब्सक्राइब करें। और ब्लॉक में नए आए हो तो सब्सक्राइब कर दे।
धन्यवाद।
जय हिंद जय भारत।
आंध्र प्रदेश का तिरुपति बाला मंदिर 1 साल का कमाई 52 हजार करोड़।
मंदिर हर साल 600 करोड़ की कमाई करते हैं।
श्री साईं बाबा मंदिर देश का सबसे फेमस मंदिरों में से एक है।
1 साल का टोटल है 2200 करोड़।
जम्मू कश्मीर का वैष्णो देवी मंदिर 1 साल में 500 करोड़ की कमाई करता है।
मंदिर में 1200 सौ करोड़ का तो सोना ही है।
मुंबई के सिद्धिविनायक 1 साल का 125 करोड़ कमाई है।
इस भारत में कुल लाख 5000 कस्बे 400 बड़े शहर। हनुमान हर गांव में मंदिर होता है। शहरों में देवी देवताओं के अलग से ही मंदिर होते हैं।
इस हिसाब से सोचिए तो देश में से ब्राह्मणों का राज है।
गुजरात का सोमनाथ मंदिर।
काशी का विश्वनाथ मंदिर।
पुरि का जगन्नाथ मंदिर।
धार्मिक स्थलों पर कैसा जमकर पूरी भरी हुई है।
जरा सोचिए हर मंदिर का दान कर दें।
तो सोचिए 1 दिन में भारत से गरीबी हट जाए।
लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे। धर्म के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाते हैं।
और ब्राह्मण लोग उसी पैसे पर मौज करते हैं।
अगली बार जब यहां याद रखें कि आपकी खून पसीने की कमाई पर कौन अस कर कौन ।
मंदिर में या मस्जिद में सीमेंट की को बोरी दान देने से पहले
पड़ोस में देखने की कोई पड़ोसी भूखा तो नहीं है है तो उसे आटे की शैली दे दीजिए।
दान करना गलत नहीं है लेकिन सोचने वाली बात है कि आपके दान से किसका भला हो रहा है।
जो लोग दान करने वालों की मानसिकता क्या है।
कई किसान भूख से मर जाते हैं लेकिन उनकी मदद कोई करने नहीं आता।
लेकिन मंदिर में करोड़ों लोग को दान कर क्या मिलता है।
हम आपको एक बात साफ करने की हम कोई नास्तिक नहीं। हमारे यह भी भगवान मैं उतनी ही आस्था जितनी आपके अंदर है।
लेकिन सोचने वाली बात यह है की जो लोग मंदिर में दान करते हैं उनके पीछे की मानसिकता क्या है।
क्या उनको भगवान से डर लगता है। ऐसे लोग जो काला धन करते हैं और उनके मन में बात रहती है कि भगवान के मंदिर में कुछ दान कर हम बच जाएंगे।
मगर आप किसी असाध्य गरीब की मदद करें उस गरीब क्यों मन से निकली है दुआ दान से भी बहुत बड़ी होगी।
लास्ट में यही कहना चाहूंगा किसी भी मंदिर में दान उतना ही करें जितना उस की जरूरत है।
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धन्यवाद।
जय हिंद जय भारत।






























Wonderful topic sir
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